पेगासस जासूसी (Pegasus spy) के कथित मामले की जांच कराने की 9 याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने गुरुवार को एक साथ सुनवाई शुरू की. पहले दिन की सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट्स (Media Reports) सही हैं तो ये आरोप काफी गंभीर हैं. हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से ये भी पूछा कि क्या आपके पास जासूसी का कोई सबूत है? संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने फिलहाल केन्द्र को इस संबंध में नोटिस भेजने से इनकार कर दिया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी.
मामले की सुनवाई शुरू होते ही चीफ जस्टिस से याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि आपकी याचिका में अखबार की कतरन के अलावा क्या है? जिसके जवाब में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा कि ये टेक्नोलॉजी के जरिए हमारी निजता पर हमला है. सूचना तक हमारी सीधी पहुंच नहीं है. एडिटर्स गिल्ड (Editors Guild)की याचिका में जासूसी के 37 सत्यापित मामले हैं. हम इसीलिए इसकी जांच चाहते हैं ताकि सच का सभी को पता चले.
चीफ जस्टिस (Chief Justice) ने कहा-हम मानते हैं कि यह एक गंभीर विषय है. लेकिन एडिटर्स गिल्ड को छोड़कर सारी याचिकाएं अखबार पर आधारित हैं. यह मसला साल 2019 में भी चर्चा में आया था. लेकिन किसी ने भी जासूसी के बारे में सत्यापन योग्य सामग्री एकत्र करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया. जांच का आदेश देने के लिए कोई ठोस आधार नहीं दिख रहा.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा (Meenakshi Arora) और एम एल शर्मा को फटकार भी लगाई. कोर्ट ने अरोड़ा से पूछा कि अगर आपको पक्का पता है कि आपके फोन की जासूसी हुई तो आपने कानूनन FIR दर्ज क्यों नहीं करवाई? इसके अलावा टॉप कोर्ट ने एम एल शर्मा से पूछा- आपके पास अखबार की कतरनों के अलावा कोई ठोस सबूत है?