क्या देश के राष्ट्रपति की वेतन से होने वाली बचत एक सामान्य शिक्षक से भी कम है. अगर खुद राष्ट्रपति की मानें तो ये बात सही है. महामहिम ने अपने कानपुर दौरे के दौरान झींझक में कहा कि कोई कहेगा कि आपको तो वेतन के रूप में पांच लाख रुपये मिलते हैं, उसी की सब चर्चा करते हैं. लेकिन उसमें से हर महीने पौने तीन लाख टैक्स के रूप में निकल जाता है. तो बचा कितना? और जो बचा उससे अधिक तो हमारे अधिकारी और दूसरों को मिलता है. जो टीचर्स बैठे हुए हैं, उन सबको सबसे ज्यादा मिलता है.
राष्ट्रपति का ये बयान अब सुर्ख़ियों में है. दरअसल राष्ट्रपति का वेतन कर के दायरे से बाहर होता है ऐसे में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब टैक्स लगता ही नहीं तो कटता क्या है. दूसरा ये कि यदि राष्ट्रपति के वेतन पर टैक्स लगता भी है तो जो रकम वो बता रहे हैं वो उस स्लैब के अनुसार नहीं है. हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि उनकी सैलरी से मौजूदा समय में 30 फीसदी की कटौती हो रही है. ये कटौती टैक्स के रूप में नहीं है बल्कि ये पैसा खुद महामहिम ने पिछले साल मई में कोरोना के कारण बने हालातों के मद्देनजर स्वेच्छा से दान करने का फैसला लिया था.