एक्टर शेखर सुमन (Shekhar Suman) जो हाल ही में संजय लीला भंसाली की 'हीरामंडी' में नजर आ रहे हैं. एक्टर ने एक इंटरव्यू में अपने 11 साल के बेटे आयुष को खोने का दर्द बयां किया कि कैसे बेटे के निधन के बाद उनका ईश्वर और उनके चमकत्कार से विश्वास उठ गया.
कनेक्ट एफएम कनाडा के साथ बातचीत में शेखर ने कहा, 'चमत्कार नहीं होते, उन्होंने उस समय को याद करते हुए अपनी बात को जारी रखा और कहा, 'एक दिन भारी बारिश हो रही थी और आयुष बहुत बीमार था. मेरे बच्चे की सीरियस कंडीशन को जानकर डायरेक्टर ने मुझसे दो-तीन घंटे की शूटिंग पर आने की रिक्वेस्ट की, और मैंने कहा, मैं नहीं आ सकता.'
हालांकि डायरेक्टर ने शेखर से कहा, 'अगर आप नहीं आए तो मेरा बड़ा नुकसान होगा जिसके बाद शेखर मान गए और शूटिंग के लिए जाने लगे. लेकिन ठीक उसी वक्त आयुष ने शेखर का हाथ पकड़ लिया और कहा, 'पापा, आज मत जाओ प्लीज़.' शेखर कहते हैं कि मुझे उसका हाथ छोड़ना पड़ा लेकिन मैंने उससे वादा किया कि मैं जल्दी आ जाऊंगा....मैं कभी उस पल को भूल नहीं सकता.'
शेखर ने कहा कि आयुष के निधन के बाद उनका विश्वास टूट गया है. उन्होंने कहा कि त्रासदी के बाद उन्होंने अपने घर में मंदिर बंद कर दिया और सभी मूर्तियां ले जाकर बाहर फेंक दी गईं. उन्होंने कहा कि मैं उस भगवान के पास कभी नहीं जाऊंगा जिसने मुझे इतना दर्द दिया, मुझे इतना दुख पहुंचाया, एक खूबसूरत, मासूम बच्चे की जान ले ली.
शेखर ने कहा कि आयुष का दर्द इतना बढ़ गया था कि उनकी पत्नी उसे दूर करने के लिए भगवान से प्रार्थना करती थी. उन्होंने कहा कि वह अभी भी उस नुकसान से उबर नहीं पाए हैं और हर दिन आयुष के बारे में सोचते हैं.
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