Dilip Kumar Jail: भारतीय सिनेमा के लेजेंड यूसुफ खान उर्फ दिलीप कुमार ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में बताया है कि कैसे उन्होंने पुणे की येरवाड़ा जेल में एक दिन और रात बितायी थी. जेलर ने उन्हें 'गांधीवाला' कहकर दूसरे सत्याग्रहियों के साथ उनके ही सेल में डाल दिया था. बात उस वक्त की है जब आजादी से पहले सन 1942-43 में दिलीप साहब पिता से कहासुनी के बाद पुणे की एयरफोर्स कैंटीन में काम कर रहे थे. यहां एक दिन उनके एक सीनियर ने उनसे कहा कि वो भारत और यहां के लोगों के बारे में अपने विचार रखें. दिलीप साहब ने जबरदस्त भाषण दिया, आजादी की लड़ाई की वकालत की और कहा कि ब्रिटिशर्स की वजह से ही हिन्दुस्तान में सारी मुसीबतें पैदा हो रही हैं. खूब ताालियां बजीं, लेकिन तभी अंग्रेज अफसर सिपाहियों के साथ आ गए और उन्हें अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भाषण देने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया.
इस वाकये का जिक्र दिलीप साहब ने अपनी आत्मकथा 'दिलीप कुमार: द सब्सटांस एंड द शैडो' (Dilip Kumar: The Substance and the Shadow) में करते हुए लिखा है कि येरवड़ा जेल में जेलर ने उन्हें गांधीवाला कहते हुए दूसरे सत्याग्रहियों के साथ उनके ही सेल में डाल दिया. उस वक्त जेल में पटेल भी मौजूद थे, और सभी सत्याग्रहियों ने पटेल के साथ भूख हड़ताल कर दी थी. उस भूख हड़ताल में दिलीप कुमार भी शामिल हो गए. यूसुफ साहब ने लिखा कि - तब सत्याग्रहियों को गांधीवाले कहा जाता था. सुबह मेरे पहचान के एक मेजर आए तो मैं जेल से छूटा. लेकिन मैं भी गांधीवाला बन गया था.'